आज की ताजा खबर

सत्यार्थ हॉस्पिटल में युवक की मौत का मामला गर्माया

top-news

लखनऊ। अपने हाथ का इलाज कराने कृष्णा नगर मेट्रो स्टेशन के पास बल्दीखेड़ा स्थित सत्यार्थ हॉस्पिटल गए लाल जी सोनकर की मौत का मामला अब गर्मा गया है। इस मामले में रायबरेली की विधायक अदिति सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस करके अस्पताल के डॉक्टरों पर शराब पीकर ऑपरेशन करने व इलाज करने में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखकर जिलाधिकारी विशाल जी भी मौके पर पहुंचे और सीएमओ से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।
 रायबरेली की विधायक अदिति सिंह ने कहा कि परिवार के बेहद करीबी लालजी सोनकर जी के साथ इलाज में घोर लापरवाही हुई है, उसके लिए हम न्याय चाहते हैं। उन्होंने कहा कि
मात्र 38 साल की उम्र में, एक छोटे से हाथ के ऑपरेशन के लिए भर्ती व्यक्ति का उचित इलाज नहीं किया गया और उनकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर जगह-जगह संदिग्ध कट मिले हैं। इस मामले को लेकर उनकी लखनऊ और रायबरेली प्रशासन से बात हुई है। हमारी माँग है कि तीन सदस्यीय विशेष समिति गठित कर इसकी गहन जांच कराई जाए। एक जनप्रतिनिधि और परिवार का सदस्य होने के नाते वह इस लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ आखिरी सांस तक खड़ी हैं। दरअसल 3880 लालजी सोनकर को डॉक्टर विनय त्रिपाठी ने बोन ग्राफ्टिंग टेक्नोलॉजी के माध्यम से हाथ की हड्डियों का इलाज करने का झांसा दिया था खुद को ऑर्थोपेडिक सर्जन और विशेषज्ञ डॉक्टर बताने वाले डॉक्टर विनय त्रिपाठी ने जहां इलाज किया था तो वही डॉक्टर शेखर सुमन एनेस्थेटिक में शामिल थे। अस्पताल के मालिक देवेंद्र सिंह का कहना है कि उनके यहां सिर्फ 10,000 हजार रूपए ही जमा कराए गए थे, बाकी का पैसा कथित डॉ विनय त्रिपाठी ने खुद लिया था क्योंकि रायबरेली से आए हुए लाल जी सोनकर का केस वही हैंडल कर रहे थे, ऐसे में पैसे की जानकारी उनको नहीं है सिर्फ उनके यहां 10,000 रूपए ही जमा कराए गए थे। सूत्र बताते हैं कि दलालों के माध्यम से अस्पताल में केस रेफर कराया जाता था और उसी से वसूली होती थी। उधर अदिति सिंह का कहना है कि परिवार वालों ने उनसे डॉक्टर के शराब पीकर इलाज करने और लापरवाही करने के की शिकायत की है इसके बाद से चीफ मेडिकल ऑफिसर की एक टीम मौके पर पहुंची थी जिसने 24 जुलाई को कमेटी के सामने डॉक्टर को पेश करने को कहा है। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों की मेहरबानी भी बताई जा रही है आगे से बिल्डिंग को इस तरह से बनाया गया है कि पता ही ना चल सके कि दो मंजिल का है कि चार मंजिल का। बताया जा रहा है कि लविप्रा में जमा कराया गया मानचित्र और मौके पर खड़े अस्पताल में जमीन-आसमान का फर्क है।


ज्यादा कमाई के चक्कर में डॉक्टर बने हैवान
लखनऊ। राजधानी में ऐसे तमाम हॉस्पिटल है, जिसमें वसूली करने के लिए मालिक ने हॉस्पिटल खोल रखे हैं। हाल यह है कि इन अस्पतालों में कौन-कौन डॉक्टर पैनल में है, इसका पता ही नहीं चलता। मात्र एक-दो डॉक्टरों का नाम बताकर बाकी प्राइवेट इंटर्न से काम चलाया जाता है।डॉक्टर अपने केस लेकर आते हैं और उन्हें हैंडल करते हैं। ज्यादा से ज्यादा पैसा अपनी जेब में रखने के चक्कर में वह ना तो विशेषज्ञ डॉक्टर को बुलाते हैं और ना ही नर्सिंग स्टाफ ही रहता है। इसी चक्कर में जरा सा भी उच-नीच होती है और मरीज की जान चली जाती है। जिसके बाद अस्पताल के मालिक भगवान के आगे किसी की नहीं चलती की कहानी सुनाकर अपना पल्ला झाड़ने के चक्कर में रहते हैं।

https://lokbharti.co.in/ad/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *